सर पे जटा जटाओं में गंगा भजन लिरिक्स

सर पे जटा, जटाओं में गंगा
रंग रूप से वो लगता मलंगा
सर पे जटा, जटाओं में गंगा
रंग रूप से वो लगता मलंगा
उसकी आभा पे मंत्र मुग्ध मन हो गया रे
वो जोगी मन मोह गया रे
वो जोगी मन मोह गया रे
बहने बाघ छाला, रमाए तन भस्म
अपनी धुन में डमरू बजाए डम डम
उसके डमरू की डम डम पे झूम उठा ये मन
उस जोगी के नाम कर दिया मैंने ये जीवन
चमके है भाल पे जिसके चंदा
झूले गले में शेष भुजंगा
उससे मिलके कैलाश जैसा मन हो गया रे
उससे मिलके कैलाश जैसा मन हो गया रे
वो जोगी मन मोह गया रे
वो जोगी मन मोह गया रे
गमछा वाला क्या कोई जादूगर था
वो मुख से हरदम बम बम हर हर करता था
वो भोला भाला, जग से निराला
था वो सन्यासी, पूछा मैंने रहत कहाँ हो
बोला वो काशी
कैसे कहूँ था वो जोगी कैसा
जग में नहीं कोई उसके जैसा
जिसने देखा उसे, वो शुद्ध खो गया रे
जिसने देखा उसे, वो शुद्ध खो गया रे
वो जोगी मन मोह गया रे
वो जोगी मन मोह गया रे